Thursday, January 1, 2015

चिटिक अगोरव.....



अँगरेजी के नवा साल बर, अतिक मया जी
कोन डहर ले  आइस , अइसन परंपरा जी  

डीजे – फीजे , नाचा – वाचा , दारू - सारू
लइका त लइका , झूमत हें  कका-बबा जी
 
उपभोक्तावादी  मन  के  तो ,  चाँदी  होगे
सेंकय रोटी , आघू  देखय , गरम तवा जी 

चैत महीना , उल्ह्वा - उल्ह्वा  डारा – पाना
चिटिक अगोरव आही असली साल नवा जी 

   
-          अरुण निगम

[हिन्दी भावार्थ - 
अंग्रेजी के नये साल के लिये इतना प्रेम !!!! किस ओर से ऐसी परम्परा आई ?
 डीजे, डांस, शराब....युवा तो युवा चाचा और दादा भी झूम रहे हैं.
 उपभोक्तावादियों की तो मानों चाँदी हो गई, सामने गर्म तवा देख रोटी सेंक रहे हैं .
चैत्र मास में नई-नई कोंपलें, डालियाँ और पत्ते, थोड़ी प्रतीक्षा करें, वास्तविक नव-वर्ष आ रहा  है. ]

1 comment:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (03-01-2015) को "नया साल कुछ नये सवाल" (चर्चा-1847) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    नव वर्ष-2015 आपके जीवन में
    ढेर सारी खुशियों के लेकर आये
    इसी कामना के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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